चलते चलते कब राह खत्म हो गई, और हंसते-हंसते कब आंख भर गई, पता ही न चला। अभी-अभी तो उनसे हंसना सीखा था, अभी-अभी तो उनसे प्यार करना सीखा था, अभी-अभी तो उनके सपनों में खोना सीखा था, लेकिन अब कुछ चुभ सा गया है इन आंखों मे, वर्ना अभी-अभी तो इन आंखों ने उनसे नजरें मिलाना सीखा था। चलते चलते कब राह खत्म हो गई, और हंसते-हंसते कब आंख भर गई, पता ही न चला। कुछ सपने अधूरे से रह गये थे, ...
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