हंसते-हंसते
और हंसते-हंसते कब आंख भर गई,
पता ही न चला।
अभी-अभी तो उनसे हंसना सीखा था,
अभी-अभी तो उनसे प्यार करना सीखा था,
अभी-अभी तो उनके सपनों में खोना सीखा था,
लेकिन अब कुछ चुभ सा गया है इन आंखों मे,
वर्ना अभी-अभी तो इन आंखों ने उनसे नजरें मिलाना सीखा था।
चलते चलते कब राह खत्म हो गई,
और हंसते-हंसते कब आंख भर गई,
पता ही न चला।
कुछ सपने अधूरे से रह गये थे,
कुछ लब्ज अनकहे से रह गये थे,
मगर अब मेरा दिल टूट सा गया है,
और उन सपनों और लब्जो को भूल सा गया है ।
अब पीछे मुड़ कर देखने को जीं नहीं करता,
ना ही उनसे फिर दिल लगाने को मन करता हैं।
चलते चलते कब राह खत्म हो गई,
और हंसते-हंसते कब आंख भर गई,
पता ही न चला।

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